Raj Karan Bansal: September 2011

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Tuesday, September 6, 2011

प्यार बिन तो रह भी लें पर तुम्हारे साथ बिना कैसे जियें,
तुम ही बताओ बसते हो तुम साँसों में, सांस लिए बिना कैसे जियें |

Monday, September 5, 2011

चेहरे की हसी से हर गम छुपाओ,
बहुत कुछ बोलो पर कुछ न बताओ,
खुद न रूठो कभी पर सबको मनाओ,
राज़ है ये ज़िन्दगी का बस जीते चले जाओ|
वो कहते हैं कि शायरी हमें कागज़ पर लिख भेजो,
वो क्या जाने मेरी शायरी में वो ही तो बसते हैं |